बच्चों के सही पोषण और उनके शुरुआती विकास को लेकर अभिभावकों को जागरूक करने के उद्देश्य से एम्स भोपाल के बाल रोग बाह्य रोगी विभाग (पीडियाट्रिक ओपीडी) में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह आयोजन राष्ट्रीय पोषण माह 2026 की श्रृंखला में हुआ, जो 9 सितंबर से 8 अक्टूबर 2026 तक मनाया जा रहा है। आहार विज्ञान विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ डायटेटिक्स) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य विषय था “बाल विकास के लिए पोषण और प्रारंभिक प्रोत्साहन”
आहार विशेषज्ञ आकांशा तिवारी ने गर्भावस्था के दौरान माँ की देखभाल (एएनसी यानी एंटीनेटल केयर) पर बोलते हुए बताया कि इस दौरान ओमेगा-3, फोलिक एसिड, आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेना क्यों जरूरी है।
आहार विशेषज्ञ श्रावणी मुखर्जी ने कहा कि जन्म के बाद पहले छह महीनों तक शिशु को केवल माँ का दूध ही देना चाहिए, और इस दौरान माताओं को कमजोरी से बचाव के लिए विटामिन डी और आयोडीन से भरपूर विविध आहार लेने की सलाह दी।
आहार विशेषज्ञ निधि वैद्य ने जन्म के तुरंत बाद शिशु को दिए जाने वाले गाढ़े पीले दूध, यानी कोलोस्ट्रम (मां के दूध का पहला और सबसे पौष्टिक रूप) के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने यह भ्रांति भी दूर की कि छह महीने से पहले शिशु को पानी, शहद या घुट्टी दी जा सकती है। आहार विशेषज्ञ शशि सिंह ने बच्चों में बढ़ते स्क्रीन टाइम के नुकसान समझाए और अभिभावकों से बच्चों को खेलकूद के लिए प्रोत्साहित करने की अपील की।
व्याख्यान के अलावा कार्यक्रम में सूचना, शिक्षा और संचार यानी आईईसी (इनफॉर्मेशन, एजुकेशन एंड कम्युनिकेशन) माध्यमों का भी प्रभावी इस्तेमाल किया गया। ओपीडी परिसर में विस्तृत बैनर लगाए गए, और आहार विज्ञान विभाग के इंटर्न्स ने जीवन के पहले 1000 दिनों के महत्व को दर्शाने वाला एक रोचक नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के अंत में एक प्रश्नोत्तर सत्र भी रखा गया, जिसमें आहार विशेषज्ञों ने अभिभावकों की व्यक्तिगत शंकाओं और चिंताओं का समाधान किया।



